केहू सुने के कहाँ तइयार बा - शम्भु शरण नवीन

हम गरीबन के दुखवा आपार बा
केहू सुने के कहाँ तइयार बा।

खेत कोड़िला जी हम, खेत जोतिला
इनका पनिया पटा, नेह जोडिला हम
पर एकरो पर नजर सरकार बा
हमनी के का इहवाँ अधिकार बा।
हम गरीबन के………………॥

देहियाँ जरि-जरि हो जाला करिया
होटवा पे फाट जाला देख पपरी
का बुझी केहू जिनगी कतना लाचार बा
छोट किसानन खातिर ना कवनो सरकार बा।
हम गरीबन के………………॥

खून जबले हमार इहाँ पानी बने
तब मिलेला हो मुँहवा के सानी इहाँ
पानी पानी बिना तरस जाला जिनगी
हमनी के जियल इहाँ धिधिकार बा।
केहू सुने के कहाँ तइयार बा॥
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शम्भु शरण नवीन




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