ठेहुना भर यारी रहल - गणेश नाथ तिवारी 'विनायक'

नाफ़ा खातिर नटई, नरेटल गइल
माठा लेखा पुरहर, फेटल गइल

जब सांच पर आंच, ना आइल तनिको
ना कढ़ी भइल ना बरी भइल, फेकल गइल

लोग के लोग से, ठेहुना भर यारी रहल
ई चलल जबले, कुछ ना सेटल भइल

इनके ढाठा , हरेठा , मुरेठा नियन नित
चुहानी में अइठ के, जोरल गइल

तबो अइठन सांच के, उनके बाँचल रहे
आधी राते के, चोकरल चहेटल गइल

इनका हियरा के बुता, बुतइले ना बुताइल
बुतावत बेहाया , अस्पताल मेन्टल गइल

कहेले गणेश लोग अपने में लागल बा
अपने से अपना लोगन के ,छोड़ल गइल
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गणेश नाथ तिवारी 'विनायक'

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