हुत्तू तुत्तू - दिनेश पाण्डेय

जोत-कोड़, हेंगी, घसियारी,
माँटी भुरकुस, चौरस क्यारी,
खादो देनीं, पनियों देनीं,
काहे निपजल खेत मरेनीं?
कइसे राज चली हो नत्थू?
हुत्तू तुत्तू।

राजा-राजा खेल कबड्डी,
दुनो गुइयाँ, एके चड्डी,
जाता चोरवा बोल पढ़ावे,
अगल-बगल अस्तीन चढ़ावे,
चले दिखउआ गुत्थमगुत्थू,
हुत्तू तुत्तू।

कवन गने घट पीपर झूले,
सटकल साध बनेचर हूले,
रकत पिसाची कोन-भँडारे,
रह-रह बान अगिनिया मारे,
उल्टा पाठ पढ़े अवधूतू।
हुत्तू तुत्तू।

ओका-बोका अलबल बानी,
नीमन लो के माथ पिरानी,
खनक सेन्ह प बिरहा गावे,
सिर धुन घरुआरी पछितावे,
के-के बनिगा बज्जरबट्टू?
हुत्तू तुत्तू।

बीड़ी दे दीं, पानो दे दीं,
थूके के पिकदानों दे दीं,
अबहीं हाथ सकेता बा से,
धोती कुरुता कवन अवाँसे?
कोरे गउँछी बान्हीं सत्तू।
हुत्तू तुत्तू।
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दिनेश पाण्डेय

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