पियवा वियोगे - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

मनवा के चैन बिलाइल हो रामा
पियवा वियोगे।

जब से गइलें पियवा विदेशवा
भेजें नाही कवनो सनेसवा
अँखिया लोरात झुराइल हो रामा
पियवा वियोगे।

सास ससुर देवर देवरानी
बिहँसे संगही क़हिके कहानी
बिरहे बीपत घहराइल हो रामा
पियवा वियोगे।

छोटी ननदी के बीख बोलिया
लगत करेजवा जइसे गोलिया
नेहिया क सोत निझाइल हो रामा
पियवा वियोगे।

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लेखक परिचय:-
नाम: जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
संपादक: (भोजपुरी साहित्य सरिता)
इंजीनियरिंग स्नातक;
व्यवसाय: कम्पुटर सर्विस सेवा
सी -39 , सेक्टर – 3;
चिरंजीव विहार , गाजियाबाद (उ. प्र.)
फोन : 9999614657
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