धीरे-धीरे लोगवा बदल जाला एक दिन - नूरैन अंसारी

धीरे-धीरे लोगवा.......... बदल जाला एक दिन
निर्मोही बनके करेजवा के छल जाला एक दिन।

अब कहाँ केहू याद करें बतिया पुरनका
भूल जाला लोग सगरी दिनवा निमनका।

जे लोग रहे आपन, आज उहे बिसारल
मन सबका से जीत के, अपने से हारल।

बरफ नियन नेकी, पिघल जाला एक दिन
धीरे-धीरे लोगवा.... बदल जाला एक दिन॥

जे साँच बा ओकरा के का केहू थाही
मुँहवा से बहुत लोग बन जाला दाहि।

खून के रिश्ता में नफ़ा-नुकसान न होला
केहू के जिनगी बनावल आसान न होला।

जे जईसन करेला फल जाला एक दिन
धिरे-धिरे लोगवा. बदल जाला एक दिन।

ना केहू आपन...ना केहू पराया बा
बड़ा बेकार भईया ई मोहमाया बा।

गरज पड़ला पर लोग तनिये में सटत बा
न त करईत साँप जईसन पीछे से डसत बा।

लोग रेंगनी के कांट नियन हल जाला एक दिन
धीरे-धीरे लोगवा..... .... बदल जाला एक दिन॥
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धीरे-धीरे लोगवा बदल जाला एक दिन - नूरैन अंसारीलेखक परिचय:-
नाम: नूरैन अंसारी
नोएडा स्थित सॉफ्टवेयर कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर
मूल निवास :ग्राम: नवका सेमरा
पोस्ट: सेमरा बाजार
जिला : गोपालगंज (बिहार)
सम्पर्क नम्बर: 9911176564
ईमेल: noorain.ansari@gmail.com

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