घरे चलि आव पिया - केशव मोहन पाण्डेय

हमरा असरा के पथरा मत गलाव पिया
घरे चलि आव पिया ना।

घेरेऽ बदरा घनघोर,
काँपे गतरे-गतर मोर
आके नेहिया के रजइया ओढ़ाव पिया
घरे चलि आव पिया ना।

कोइली बोलेले टिभोली,
मारे हियरा में गोली
झोली भर के दवाइया लेआव पिया
घरे चलि आव पिया ना।

धइलस सावनी फुहार,
भींजल तन के तार-तार
हउव तूहीं मोर आधार ना रिगाव पिया
घरे चलि आव पिया ना।

जानतानीऽ मजबूरी
बाटे नोकरी जरूरी
दूरी हमरो कबो तऽ मेटाव पिया
घरे चलि आव पिया ना।
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घरे चलि आव पिया - केशव मोहन पाण्डेयलेखक परिचय:-
नाम - केशव मोहन पाण्डेय
2002 से एगो साहित्यिक संस्था ‘संवाद’ के संचालन।
अनेक पत्र-पत्रिकन में तीन सौ से अधिका लेख
दर्जनो कहानी, आ अनेके कविता प्रकाशित।
नाटक लेखन आ प्रस्तुति।
भोजपुरी कहानी-संग्रह 'कठकरेज' प्रकाशित।
आकाशवाणी गोरखपुर से कईगो कहानियन के प्रसारण
टेली फिल्म औलाद समेत भोजपुरी फिलिम ‘कब आई डोलिया कहार’ के लेखन
अनेके अलबमन ला हिंदी, भोजपुरी गीत रचना.
साल 2002 से दिल्ली में शिक्षण आ स्वतंत्र लेखन.
संपर्क –
पता- तमकुही रोड, सेवरही, कुशीनगर, उ. प्र.
kmpandey76@gmail.com

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