विनती - प. व्रतराज दुबे 'विकल'

विनती करिने हमू माई सुरसती जी के।
विदया के देवी बुधिमती महारानी के।।

सुमती कुमती सब गति के सम्हारेवाली।
हंस असवार महतारी वीनापानी के।।

देदीं तनी ध्यान संविधान के विधान पर।
दसवा बदल दीं भोजपुरी के कहानी के।।

हमनी के बेरी मत देरी करीं भगवती।
हरीं भोजपुरियन के सकल हरानी के।।
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प. व्रतराज दुबे 'विकल'प. व्रतराज दुबे 'विकल'

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