इनरा मरि गइल - केशव मोहन पाण्डेय

कहीं होत होई नादानी
बाकिर
हमरा गाँवे तऽ
इनरा के पानी
सभे पीये
सबके असरा पुरावे इनरा
तबो मरि गइल
ईऽ परमार्थ के पुरस्कार
काऽ भइल?
समय के साथे
लोग हुँसियार हो गइल
इनरा के पानी
बेमारी के घर लागे लागल
लोग रोग-निरोग के बारे में
जागे लागल।
लोग जागे लागल
आ इनरा भराए लागल
लइका-सेयान
सभे कुछ-कुछ रोज डाले
इनरा के सफाई के बात
सभे टाले,
अब इनरा के साँस अफनाए लागल
लोग ताली बजावे लागल
कि अब केहू बेमार ना होई।
आज हाहाकार बा पानी खातिर
बात बुझाता अब
कि आम कहाँ से मिली
जब रास्ता रुन्हे खातिर
लोग बबूल बोई।
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केशव मोहन पाण्डेयलेखक परिचय:-
नाम - केशव मोहन पाण्डेय
2002 से एगो साहित्यिक संस्था ‘संवाद’ के संचालन।
अनेक पत्र-पत्रिकन में तीन सौ से अधिका लेख
दर्जनो कहानी, आ अनेके कविता प्रकाशित।
नाटक लेखन आ प्रस्तुति।
भोजपुरी कहानी-संग्रह 'कठकरेज' प्रकाशित।
आकाशवाणी गोरखपुर से कईगो कहानियन के प्रसारण
टेली फिल्म औलाद समेत भोजपुरी फिलिम ‘कब आई डोलिया कहार’ के लेखन
अनेके अलबमन ला हिंदी, भोजपुरी गीत रचना.
साल 2002 से दिल्ली में शिक्षण आ स्वतंत्र लेखन.
संपर्क –
पता- तमकुही रोड, सेवरही, कुशीनगर, उ. प्र.
kmpandey76@gmail.com

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