आँख में रात बहुते सयान हो गइल - डॉ. हरेश्वर राय

आँख में रात बहुते सयान हो गइल
हमार असरे में जिनिगी जिआन हो गइल।

दिल के दरिया में दर्दे के पानी रहल
देंह जइसे कि भुतहा मकान हो गइल।

आस के डोर टूटल कटल भाईजी
आइल सपनों त अचके बिहान हो गइल।

हमरा होंठ के बगानी में फूल ना खिलल
मन क चउरा क तुलसी झंवान हो गइल।

संउसे जिनिगी कटल उनकर रहिये तकत
मौत के राह बहुते आसान हो गइल।
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आँख में रात बहुते सयान हो गइल - डॉ. हरेश्वर राय लेखक परिचय:-
नाम:- डॉ. हरेश्वर राय
प्रोफेसर (इंग्लिश) शासकीय पी.जी. महाविद्यालय सतना, मध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनी, जवाहरनगर सतना, म.प्र.,
मो नं: 9425887079
royhareshwarroy@gmail.com

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