ना एने के ना ओने के - डॉ. हरेश्वर राय

अपने ही देशवा में भइनी बिदेशिया रे
जाके कहाँ जिनिगी बिताईं ए संघतिया।

खेत खरिहान छूटल, बाबा के दलान छूटल
दिल के दरद का बताईं ए संघतिया।

तीज तेवहार गइल, जियल मोहाल भइल
मनवाँ में घूलत बा खँटाई ए संघतिया।

दक्खिन में दूर दूर, उत्तर में मार मार
कहाँ जाके हाड़वा ठेठाईं ए संघतिया।

गाँव घर मुँह फेरल, नाहीं केहु परल हरल
रोकले रुकत ना रोवाई ए संघतिया।

एहिजे के भइनी ना ओहिजे के रहनी रे
मन करे फँसरी लगाईं ए संघतिया।
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ना एने के ना ओने के - डॉ. हरेश्वर रायलेखक परिचय:-
नाम:- डॉ. हरेश्वर राय
प्रोफेसर (इंग्लिश) शासकीय पी.जी. महाविद्यालय सतना, मध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनी, जवाहरनगर सतना, म.प्र.,
मो नं: 9425887079
royhareshwarroy@gmail.com

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