अब सहात नइखे - डॉ. हरेश्वर राय

हमरा का हो गइल बा बुझात नइखे
हीत गीत मीत कुछुओ सोहात नइखे।

हम त दउरत रहिला फिफिहिया बनल
हमरा जतरा के रहिया ओरात नइखे।

हमके एक-एक मिनटवा पहाड़ लागेला
हाय! रात रछछिनिया कटात नइखे।

हमके बिस्तर प लागे कवाछ बिछल बा
हमसे करवट के बदलल रोकात नइखे।

दिल में अतना दरद बा कि का हम कहीं
कवनों बएदा बोला दीं इ सहात नइखे।
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लेखक परिचय:-
नाम:- डॉ. हरेश्वर राय
प्रोफेसर (इंग्लिश) शासकीय पी.जी. महाविद्यालय सतना, मध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनी, जवाहरनगर सतना, म.प्र.,
मो नं: 9425887079
royhareshwarroy@gmail.com

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