बिनु गीत के - अविनाश चन्द्र विद्यार्थी

कुँहुँकत बा जहान बिनु गीत के
डहकत बा परान बिनु मीत के।

हरिअरिया बे-फुहार के झुरात बा
फुलवरिया ई बहार में धुँवाँत बा
धन्हकत बाटे आँचि अनरीत के।

बा लहरिया, ना नजरिया में हुलास बा
लहवरिया में नगरिया ई उदास बा
चहकत बा बिचार हार-जीत के।

मोहेला अल्हड़ करेज तनिक छोह से
सोहे ना बचनियाँ मुँह में मन का द्रोह से
सहकत बा सिंगार बे-पिरीत से।

झलकी रूप-रंग असली नवका भोर में
तनिका नेहिया लगवले जा अँजोर में
लहकत बाटे जियरा दियरा हीत के।
डहकत बा परान बिना मीत के॥
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अविनाश चन्द्र विद्यार्थी


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