पढ़बऽना पछतायेक परी - आकाश महेशपुरी

दर-दर ठोकर खायेक परी
पढ़ब
ना पछतायेक परी।

पढ़ लिख के राजा के होई
ई सोची जिनिगी भर रोई
आइल बाटे नया जमाना
भइल कहाउत बहुत पुराना।

कहे इहे अब सउसे टोला
पढ़े उहे बस राजा होला
अनपढ़ कइसे राजा होई
दुसरे के बस्ता जब ढोई।

इस्कूली में जा ये बाबू
विद्या में असली बा काबू
विद्या के तू यार बना लऽ
हक वाला हथियार बना लऽ।

आवारा के संघत छोड़ऽ
शिक्षा से बस नाता जोड़ऽ
मनवा के नाहीं भटकइबऽ
काहें ना नोकरी तू पइबऽ।

नोकरी का! डी यम हो जइबऽ
पढ़बअ तअ सी यम हो जइबऽ
पढ़-लिख के खेतियो जे करबऽ
सबसे बेसी पइसा झरबऽ।

बिजनस या दोकानोदारी
पढ़ी उहे बस बाजी मारी
गाँव नगर में इज्जत पाई
पढ़ी उहे दुनिया में छाई।

कदम कदम पअ कामे आई
पढ़बअ ऊ बाँवे ना जाई
छुछनरई येही से छोड़ऽ
विद्या धन से नाता जोड़ऽ।

गलत-सलत से ध्यान हटा के
अच्छाई के पास बुला के
बाबू हो तू नाव कमा लऽ
गाँव-नगर में धाक जमा लऽ।
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आकाश महेशपुरीलेखक परिचय:-
नाम: वकील कुशवाहा 'आकाश महेशपुरी'
जन्म तिथि: २०-०४-१९८०
पुस्तक 'सब रोटी का खेल' प्रकाशित
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित
कवि सम्मेलन व विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मान पत्र
आकाशवाणी से कविता पाठ
बेवसाय: शिक्षक
पता: ग्राम- महेशपुर,
पोस्ट- कुबेरस्थान
जनपद- कुशीनगर,
उत्तर प्रदेश
मो नं: 9919080399

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