जेठ आषाढ़ माह - श्याम कुँवर भारती

जेठ आषाढ़ माह गरमी के दिनवा।
मिले नाहीं ठोर कही टप टप चुएला पसीनवा।

ठीक दुपहरिया माथे बरसेला अगिया ,
गाछ बिरिक्ष सूखे लागल सुरूज़ के धूपिया।
बिछावा तनी खटिया रनिया छावें अंगनवा
जेठ आषाढ़ माह गरमी के दिनवा।

हाली हाली ओसावा गोरी गेंहूआ के दनवा ,
भूसा भूसी उठावा खियावा घुघुनी चनवा।
रोवत बा लइकवा दुधवा पियावा अंगनवा
जेठ आषाढ़ माह गरमी के दिनवा।

आई गईली गर्मी तनी बेनिया डोलावा ,
आमवा के चटनी गोरी तनी पीस के खियावा।
गरमी के मारे कही मिले ना चयनवा
जेठ आषाढ़ माह गरमी के दिनवा।

नदिया तालाब और पोखर सुख गईले ,
चापाकल के मूहवा भारती बालू बहिरईले।
चिरई चउआ छाया खोजे जाके केवनों बनवा
जेठ आषाढ़ माह गरमी के दिनवा।
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Bhojpuri Literature, Bhojpuri Magazine, भोजपुरी पत्रिका, भोजपुरी साहित्य, Shyam Kunwar Bhartiलेखक परिचयः
नाम: श्याम कुँवर भारती
मो: +91 9955509286
पता: स्टाफ कॉलोनी, ढ़ोरी हिस्पेन्सरी के सामने,
ढ़ोरी, बोकारो 825102, 
झारखण्ड, भारत

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