आन्हर घुमची - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

घेंटा मिमोरत
तोड़त – जोड़त
आपन –आपन गावन
अपने अभिनन्दन
समझवनी के बेसुरा सुर
बिना साज के
संगीत साधना

झाड़ झंखाड़ से भरल
उबड़ खाबड़ बंजर जमीन
ओकर करेजा फारत
फेरु निकसत
कटइली झाड़
लरछे-लरछे लटकल पाकल
लाल टहक घुमची
अपने गुमाने आन्हर
दगहिल घुमची

देखलो पर
अनदेखी करत
अनासे शान बघारत
बरियारी आँख देखावत
अनेरे तिकवत
बिखियायिल मुसुकी मारत
औंधे मुँह
धूरी में सउनाइल धुमची
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Jai Shankar Prasad Dwivedi, भोजपुरी कविता, भोजपुरी साहित्य, भोजपुरी साहित्यकोश, Bhojpuri Poem, Bhojpuri Kavita, Bhojpuri Sahitya, Bhojpuri Literature, Bhojpuri Sahityakosh, Bhojpuri Magazine, भोजपुरी पत्रिकालेखक परिचय:-
नाम: जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
संपादक: (भोजपुरी साहित्य सरिता)
इंजीनियरिंग स्नातक;
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