आ गइलन - भोला प्रसाद ‘आग्नेय’

जमीन पे नभ से उतर के आ गइलन।
सफर के नाम कुछ कर के आ गइलन॥

ख्वाहिश रहे फूलन के खुश्बू के।
झोली में काँटे भर के आ गइलन॥

मन में तमन्ना बा अमर होखे के।
सभकरा नजर में मर के आ गइलन॥

जियते आपन मजार बनावे बदे।
उजाड़ कवनो छप्पर के आ गइलन॥

जवने के रक्षा रहल उनुके जिम्मा।
ओही क्यारी के चर के आ गइलन॥

उड़ानो कल्पना के अब का होई।
जब पंख गीत के कतर के आ गइलन॥

चाहत में गजल के थक के पहिलहीं
धर्मशाला में ठहर के आ गइलन॥

जवन शब्द बाँचल रहे ‘आग्नेय’ के।
उहो ऊ डीठारे हार के आ गइलन॥
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