संपादकीय

नाच रहल बा - गुलरेज शहजाद

अलगे-अलगे दयरा में
डुगडुग्गी बाजे
अलगे-अलगे खेल तमासा
करतब होता
अपना आप से टकराहट बा
आपने धूरी पर सब केहू
नाच रहल बा।

एको डेग के आगे बढल
लउकत नइखे
अलगे-अलगे मठाधीस आ
संत- महंथन के उपिटाइल
देख रहल बानीं हम सगरो
भोजपुरी माई के अंचरा
चेथड़ा-चेथड़ा भइल जाता
अधिकार के मांग के पुर्जा
उड़ल जाता।

आपन -आपन कबरगाह के
अलगा-अलगा मुर्दा नियन
कब ले सकित रहल जाई?
अब कतना ले बाट जोहाई?
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लेखक परिचय:-
नाम - गुलरेज शहजाद
कवि एवं लेखक
चंपारण (बिहार)
E-mail:- gulrez300@gmail.com

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