संपादकीय

खेत खईलस - दिलीप कुमार पाण्डेय

लाठी भाला लेके होता खेत के रखवारी
चतुर भईसा लुकाईल बा बाँस काआरी।

अतने में बैल तुरईला के भईल हाला
दउरल लोग बैल धरे फेक के भाला।

मौका पाई भईसा मकई गईल चर
दूरे से चिल्लाते रह गईल लो धर धर।

रमत झमत भईसा सडक पर आईल
ढेर दिन बाद कचराईल मकई रहे भेटईल।

बडल जोरदार खिस देख मकई के दासा
भईसा के फसावे खातिर फेके परी पासा।

एक दिन सांझहीं भईसा खेत में समाईल
लागल जब बर्छी खेतवाह नजर आईल।

ओकरा बाद भईसा छोडलस बाधार
भईस पोसे आला लोग का भईल दिकदार।

दूटंगरिआ हमरा पर परल आज भाड़ी
फेरू ना जाएब हरीअर खेत का आरी।
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लेखक परिचय:-
नाम-दिलीप कुमार पाण्डेय
बेवसाय: विज्ञान शिक्षक
पता: सैखोवाघाट, तिनसुकिया, असम
मूल निवासी -अगौथर, मढौडा ,सारण।
मो नं: 9707096238

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