संपादकीय

बहुत दिनन पिय बसल बिदेसा - धरनीदास

बहुत दिनन पिय बसल बिदेसा।
आजु सुनल निज अवन संदेसा।

चित चिवसरिया मैं लिहलों लिखाई।
हृदय कमल धइलों दियना लेसाई।

प्रेम पलँग तहँ धइलों बिछाई।
नखसिख सहज सिंगार बनाई।

मन हित अगुमन दिहल चलाई।
नयन धइल दोउ दुअरा बैसाई।

धरनी धनि पलपल अकुलाई।
बिनु पिया जिवन अकारथ जाई।
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लेखक परिचय:-
नाम: धरनीदास
जनम: 1616 ई (विक्रमी संवत 1673)
निधन: 1674 ई (विक्रमी संवत 1731)
जनम अस्थान: माँझी गाँव, सारन (छपरा), बिहार
संत परमपरा क भोजपुरी क निरगुन कबी
परमुख रचना: प्रेम प्रकाश, शब्द प्रकाश, रत्नावली

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