संपादकीय

आज के राजनीति - जलज कुमार अनुपम

आजु के लफंगा नेता बनीहे काल्हु
कबो चारा कबो बेचीहे ई आलू
मत करिह कबो इनका परि
ई चीज हउए बड़का चालू।

आजकल देख के दृश्य राजनीती के
मनवा हमर बहुते पछताला
देखि के आजु हालत एक्नीके
गिरगिट अउरी जयचंद भी सरमाला।

आजु राजनीती एगो बन गईल बाटे धंधा
जेतना बढ़ी राउर ताकत ,जेतना होखेम रउरा ख़राब
ओतने मिली रउरा चंदा
बाटे रउरा सबन से एगो अनुरोध मत देखि जात पात
चुनी हरदम ईमानदार माँ भारती के बंदा
रोटी पैसा से आगे आगे आई
करी मुल्क के बात
मतदान सबसे जरुरी
बढ़िया चुनी छोड़ी जात – पात।

अइसन हरदम केहु के चुनी जे होखे
देशवा खातिर समर्पित
गर जरुरत आ जाये त
कर देवे समाज खातिर
आपन तन मन धन अर्पित
अइसन करी निर्माण की न हो घोटाला
जनता बने आला भ्रस्टाचार के मुह पे लगायी ताला
सब कुकर्मी जेल में जाओ
न फेरु पैदा होखे केहु
राजा कलमाड़ी अउरी चौटाला
रउरा आदमी के ना लोकतंत्र के जितायी
अपना अपना जात के ना
अपना अपना भाषा भाषी के ना
माँ भारती के पुतन के विजयी बनायीं।
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लेखक परिचय:-
नाम- जलज कुमार अनुपम
दिल्ली ई-मेल:- merichaupal@gmail.com

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