राष्ट्रीय-बिरहा - मन्नन द्विवेदी 'गजपुरी'

ताग्गुड़ी नगारा बाजै,सेखुवा की लकड़ी
जबरे कै ठेंगा बाजे,निबरे की खोपड़ी।

जाजरजधिराज!हम राउर के परजा
रउरे के राति दिन गाईं गुन चरचा।

राउर पसीना ढुरै लोहुवा ढुराईं
पाईं जौ हुकुमवा समुन्दर थहाईं।

तुहरि खइरि काली माई से मनाईं
मरी औ मसान के करहिया चढ़ाईं।

थारी लोटा बेंचि के रसदिया जुहइलीं
नाती पूता भेजि कै झगरवा जितइलीं।

भारत केर असमियां हे समियां
जेइसै परम दुधारी गाय।

चेम्सफोर्ड ओ डायर के देखत
डायर मतिया गइलि बउराय।

नाहक निहत्थन पै हथवा चलइलैं
अपने कुला के मरजदवा घटइलैं।

केतनी कामिनी के सोहगवा मिटइलैं
केतनी बखरिया में टटिया लगइलैं।

असिल मलिकवा से बतियां छपइलैं
देसवा बिदेसवा में हसिया करइलैं।

जड़वा में हंटर 'बाबू'के दउरइलैं
नी सूंक जिऊ खपरी में नइलैं।

कइसे कै खेलीं फगुइया हो भइया
रोजै उठेला करेजवा में सूल।

अइलेन तुहरी सरनियां महाराजा!
देखयो परै न नियइया में भूल।
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मन्नन द्विवेदी 'गजपुरी'

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