विविध

अंचरवा - सरोज सिंह

हमरे अंचरवा पs जिनगी के दाग बा
छोड़sवले नाही छूटत यार बलम जी॥

जवने रंगवा के पगsरिया रंगवलs
ओही रंगे रंगब संसार बलम जी।
हमरे अंचरवा पs ..........॥

जिनगी के चउंध से मनवा उबियाईल
नाही केहू तोरे नियर दिलदार बलम जी।
हमरे अंचरवा पs .............॥

जोबन के जर में लागsता दियका
ढहल उमीरिया मांगे उद्धार बलम जी।
हमरे अंचरवा पs..............॥

सगरो उठी सोर जब आई बरियात
लोराईल नेहिया लिपी घर-दुआर बलम जी।
हमरे अंचरवा पs...........॥

बिरथा गवsवनी कुछु ना कमsवनी
मांगी नेगचार त देब साँस उधार बलम जी।
हमरे अंचरवा पs .............॥

बीदाई के बेरी तू भेजिहs असवारी
दुल्हिन अस करब सिंगार बलम जी।
हमरे अंचरवा पs ..............॥
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लेखक परिचय:-

नाम: सरोज सिंह
शिक्षा: स्नातकोत्तर (भूगोल) एवं बी एड
पेशा: जॉइंट सेक्रेटर, सी आई एस ऍफ़ के महिला परिवार कल्याण "संरक्षिका "
जनम: बलिया (उ .प्र .)
जनमदिन: 28-01-70
निवास: गाज़ियाबाद
रचना: तुम तो आकाश हो (काव्य संग्रह),
"स्त्री होकर सवाल करती है","सुनो समय जो कहता है" काव्य संग्रह में कवितायें संकलित
हिंदी व भोजपुरी भाषा में लेखन व बँगला कविताओं का अनुवाद
अंक - 89 (19 जुलाई 2016)

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