विविध

अंजन जी कऽ तीनगो मुक्तक

1.
सब दिन नए ना रहे, पुरान हो जाला
नीमनो चीज कबो हेवान हो जाला।
समय से बढ़ि के कुछऊ ना होला
मुरगा ना बोलेला तबो बिहान हो जाला।
-------------------------------2.
झूठे टाही लगवले बाड़, मिली ना
ओह ऊसर में गुलाब खिली ना।
जानते बाड़, जवन भूत ध लीहले बा
केतना फूंक मारल जाई, ढिली ना।
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3.
नाता के तनला से तनाव होला
नीयरे रहि के दुराव होला,
नाता, पइसा पर कीनी-बेंची मति
लोभ का आगी में ढेर ताव होला।
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लेखक परिचय:-

नाम: राधा मोहन चौबे 'अंजन'
जनम: 4 दिसम्बर 1938
जनम थान: शाहपुर-डिघवा, थाना-भोरे
गोपालगंज, बिहार
रचना: कजरौटा, फुहार, संझवत, पनका, सनेश, कनखी, नवचा नेह,
अंजुरी, अंजन के लोकप्रिय गीत, हिलोर आदि
अंक - 86 (28 जून 2016)

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