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आजु मोरी घरनी - बिसराम

आजु मोरी घरनी निकरली मोरे घर से,

मोरा फाटि गइले आल्हर करेज। 

राम नाम सत सुनि मैं गइलों बउराई,
कवन रछसवा गइल रानी के हो खाई॥

सुखि गइलें आंसु नाहीं खुलेले जबनिया,
कइसे के निकारों मैं तो दुखिया बचनिया॥

आजु उनसे नाता टूटि गइलें मोरे भइया,
आजु मोरी छुटि गइली उनसे सगइया॥

मोरी अहियन से उनकी चिता धुंधुंअइलीं,
चितवा पे सोवल रानी राखी हाई गइली॥

कहै ‘बिसराम’ नाहीं धनी रहली राम,
रहलें चारि जना के परिवार॥

ओही में से घात एक ठे कइले पापी देवा,
नाहीं कइलें मोरे गरीबी पर विचार॥
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लेखक परिचय:-


नाम: बिसराम
जनम: 1924-25
 जनम थान: आजमहढ़ 
मरन: 1947
विशेष: बिरहा
अंक - 77 (26 अप्रैल 2016)

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