संपादकीय

बोलऽ बोलऽ कागा - मास्टर अजीज


बोलऽ बोलऽ कागा तूहूँ साम के खवरिया, कइसन बाड़ी ना?
मोरा मन के मोहनवाँ, कइसन बाड़े ना?

सखिया-सलेहर रोये, रोये धेनु गइया, कइसन बाड़ी ना?
साँवर साम के सुरतिया, कइसन बाड़ी ना?

खेत-खरिहान रोये, रोये मधुवनवाँ, कइसन बाड़ी ना?
उनकर बाँस के बँसुरिया, कइसन बाड़ी ना?

सिकहर टांगल रोये माखन के मटुकिया, कइसन बाड़ी ना?
नन्हकी बाँह के अँगुरिया, कइसन बाड़ी ना?

जहिया देब कागा साम के खबरिया, बरदानवा देबि ना?
जुग-जुग जिओ तोहर जोड़िया, वरदनबा देबि ना?

‘मास्टर अजीज’ जिया कुहु-कुहु कुहुके, कोइलिया कुहुके ना?
जइसे भोर-भिनसहरा, ई कोइलिया कुहुके ना?

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- मास्टर अजीज
अंक - 74 (05 अप्रैल 2016)

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