संपादकीय

बेटवा तोहार हो - अभिषेक यादव

जै हो माई शारदा
सुनी लऽ पुकार हो,
अरजी करेला माई
बेटवा तोहार हो

नाही चाहि धन-मान
नाही चाहि सुख हो,
ऐतने गोहार माई
देले रह दुःख हो!

जब-जब झूठ बोली
मुँह दुखलाए लागे,
बाउर जे बात सुनी
कान से पराये लागे!

जदि करि लूट-पाट
जाने सभ जवार हो,
अरजी करेला माई
बेटवा तोहार हो

रूप के घमंड करीं
मुँह दढ़ियाए लागे,
करीं जे भी हथजोड़ी
पेट बढ़ियाए लागे!

जांगर में घून लगे
बना दऽ बनिहार हो,
अरजी करेला माई
बेटवा तोहार हो

आँख जे तरेरली तऽ
डाली दऽ मनार हो,
अरजी करेला माई
बेटवा तोहार हो

चली जे भी ऊँच-नीच
गोड़ अंगिराए लागे,
सोझा करिं चपलूसी
उहो खिसियाए लागे!

माहुर जे उगली तऽ
आवे ना डकार हो,
अरजी करेला माई
बेटवा तोहार हो

करि जब नेतागिरी
देंह करियाए लागे,
तन-धन हलूक बाकिर
मन गढ़ियाए लागे!

पढ़ल-लिखल कम
हम बानि ढ़ेर गँवार हो,
अरजी करेला माई
बेटवा तोहार हो

दसो नख जोड़ी के
राउर करिले गोहार हो,
अरजी करेला माई
बेटवा तोहार हो
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अंक - 54 (17 नवम्बर 2015)

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