विविध

दिलीप कुमार पांडेय जी कऽ तीन गो कबिता


दिलीप कुमार पाण्डेय जी कऽ तीन गो कबिता 'ई होई कब ले', 'गोहार' औरी 'अनुआई हजार' समाज में जेवन हो रहल बा ओकरा बारे में आपन बात कहत बाड़ी सऽ। 'ई होई कब ले' भोजपुरिया गीत-संगीत में फइलल फुहरकम के बात बतियावत बे तऽ 'गोहार' भरस्टाचार के खिलाफ बोली ऊँच करत बे। ओही जा 'अनुआई हाजार' में कबी समाज के उल्टा चाल कऽ बात करत बाड़े जहवाँ नेता समाज के नोकसान करत बा तबो नेतन के अनुआई हजारन बाड़े। एही उल्टा चाल के कारन आज समाज कऽ ई दसा भइल बा औरी लोग ओही के आगे बढावत बाड़े। कुल्ह मिला के ई तीनो कबिता समाज के सीसा देखावे के परियास करत बाड़ी सऽ। सबदन कऽ परियोगो बहुते आसान बा जेवन केहूए समझ सकेला।
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इ होई कब ले

चारो ओर हल्ला बा अश्लीलता के,
गवईया पार कईले हद शालीनता के।
चिड़ई चुडुङों अब मुदऽता कान,
छेड़ऽतारे गवईया लो जब तान।
ध्वस्त होखऽता अपना भाषा के मान,
नईखे एकर हो भाई सभे का भान।
कईसे दूर होई मनोभाव हीनता के,
गवईया पार कईले हद शालीनता के।
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गोहार

भ्रष्टाचारियन के मत खुलो खातवा ए माई
भेजीं जेल में ई पिसऽ सऽ जांतवा ए माई
भेजीं जेल में ई पिसऽ सऽ जांतवा ए माई-----

करेलेंसऽ अतहते एकनी का जितला पर,
घिंस जाला चप्पल दउरत एकनी का दुअरा पर।
बदली ना एकनी के आदतवा ए माई
भेजीं जेल में ई पिसऽ सऽ जांतवा ए माई---
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अनुआई हाजार

जनता का हित से जे करे खेलवाड़,
ओकर अनुआई बाड़े हाजार।
आमानत में जे करे खेयानत,
ओकर इज्जत बाटे सलामत।
सरकारी धन जे छन में गटके,
ओकरा गरदन में लम्हर माला लटके।
रंग रंगदार लोके कहीं गाड़ी अंटके,
आ जाय नेताजी के फोन टटके।
केहू केहू देखावे रंग आपन हटके,
ओढ़ी कमर भीतरे घीव गटके।
नेतागिरी के चमकल बा बाजार,
एकर अनुआई बाड़े हाजार॥

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लेखक परिचय:-

बेवसाय: विज्ञान शिक्षक
पता: सैखोवाघाट, तिनसुकिया, असम
मूल निवासी -अगौथर, मढौडा ,सारण।
मो नं: 9707096238
अंक - 36 (14 जुलाई 2015)
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