संपादकीय

अंक - 14 (10 फरवरी 2015)

आज रऊआँ सभ के सोझा मैना के चऊदहवाँ अंक परस्तुत बा। निक लागता कु्छ दूर तक आईल बानी जा। ए अंक में दू गो रचनाकार के रचना परस्तुत बावे। एमे भोला जी के पाँच गो कबिता औरी नबीन कुमार के शायर तेग अली के बदमाश दर्पण पर एगो लेख बा।
- प्रभुनाथ उपाध्याय
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तोहरा नियर केहू ना हमार बा॥
देखला प अंखिया से लउकत संसार बा॥

मनवा के आस विश्वास मिलल तोहरा से
जिनिगी के जानि जवन खास मिलल तोहरा से॥

तोहरे से जुड़ल हमार जिनिगी के तार बा
देखला प अंखिया से लउकत संसार बा॥

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तेग अली जी के बारे मे हमरा डा. कृष्णदेव उपधिया जी के लिखल किताब मे कुछ पढे के मिलल रहे। इँहा के "बदमास दर्पण" किताब भी छपाईल बिआ जवन की प्रिंट एशिया मे मिल सकेले। इँहा के बनारस के रहे वाला रहनी। करीब करीब 1895 मे इँहा के लिखल किताब "बदमास दर्पण" आईल रहे।
इँहा के बारे मे खोजत रहनी ह त एगो ब्लाग बिनय पत्रिका भेंटाईल ह जहवा इँहा के बारे कुछ जानकारी दिहल बा, खास कई के इँहा के लिखल किताब "बदमास दर्पण" के बारे मे दिहल गईल बा ओह ब्लाग मे हेडिंगे बा की "बनारस के गुंडा शायर तेग अली का बदमाश दर्पण"।
बिनय पत्रिका मे अखिलेस जी लिखत बानी की, तेग अली सांचहु के गुंडा रहले, आ अखिलेस जी इहो लिखत बानी की आजु के साहित्यकार लोगन के तेग अली जी से सीखे जाने के चाही !

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