आँतर के बात खुलि के बतावेला चेहरा - सूर्यदेव पाठक'पराग'

आँतर के बात खुलि के बतावेला चेहरा
मत पूछीं, का बवाल मचावेला चेहरा

आँखिन से झर के लोर समुन्दर बन भले
हुलसत हिया रहेला त गावेला चेहरा

अइसन ना भूत चढ़ति बा कपार पर
खुद के ही आइना में डेरावेला चेहरा

व्यवहार एगो-गीत ह बुझीं तनी ‘पराग’
गैरो के हित-मिति बनावेला चेहरा
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सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

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