लाली-लाली डोलिया हो हमरी दुअरिया
पिया मोरा लेईके अइलें
संगवाँ में चारि रे कहाँर।
पिया मोरा लेईके…
अबहीं उमरिया मोरी बारी रे अनारी
कि जिया मोरा थर-थर काँपे
सखि सब करेली सिंगार।
पिया मोरा लेईके…
बाबा मोरा दुअरे रोवें, भइया हो अँगनवाँ
कि भउजी मोहें धइ-धइ रोवें
माई के नयन जलधार।
पिया मोरा लेईके…
एक मन करे, कहँरा-डोलिया फेरवतीं
कि दुजे पिया रूठि हो जइहें
होई जइबों नइहरे कऽ भार।
पिया मोरा लेईके…
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लेखक परिचय:-
नाम: भोलानाथ गहमरी
जन्म: 19 दिसंबर 1923
मरन: 2000
जन्म थान: गहमर, गाजीपुर, उत्तरप्रदेश
परमुख रचना: बयार पुरवइया, अँजुरी भर मोती और लोक रागिनी

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