सारी सारी रतिया जगावे कोईलि तोरी बिरहिन बोलिया - भोलानाथ गहमरी

सारी सारी रतिया जगावे।
कोईलि तोरी बिरहिन बोलिया।
सारी-सारी…

एक तऽ डोलावे रामा पूरूबी बयरिया,
दूजे सुधि आवे परदेसिया संवरिया,
रहि-रहि अगिया लगावे
कोईलि तोरी बिरहिन बोलिया।
सारी-सारी…

लूकि-छीपि झांके चान हमरी अटरिया,
मन के सगरवा में ऊठेले लहरिया,
छन-छन जीया तड़पावे
कोईलि तोरी बिरहिन बोलिया।
सारी-सारी…
तन तोरा करिया तऽ गरवा बंसुरिया,
सबका के रस देलू हमके महूरिया,
सुनते करेजा कुहुँकावे
कोईलि तोरी बिरहिन बोलिया।
सारी-सारी…
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लेखक परिचय:-
जन्म: 19 दिसंबर 1923
मरन: 2000
जन्म थान: गहमर, गाजीपुर, उत्तरप्रदेश
परमुख रचना: बयार पुरवइया, अँजुरी भर मोती और लोक रागिनी

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