प्रतिज्ञा - प्रसिद्ध नारायण सिंह

अब हम चरखा चलइबै अरे सावनवां॥

मनवां बोवइबै, रूई उपजइबै,
धुनियां से रुइया धुनइबै॥
अरे।

बढ़ई बोलाइ चरखा बनवइबै,
दिन रात सुतवा कतइबै॥
अरे।

खट्टर सुदेसी सब को पहिनइबै,
कपड़े विदेशी जलइबै॥
अरे।

जात करोड़न लादि जो बिदेसवा में,
धन हम अपना बचइबै॥
अरे।

करके सुदैसिया के अब परचार
हम भारत बन्दी छोड़इबै॥
अरे।


कहत 'प्रसिद्ध' नाहीं डर जेलखनवा कै
देश हित गरवा कटइबै॥
अरे।
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लेखक परिचय:-
नाम: प्रसिद्ध नारायण सिंह
जनम: जुलाई 1901
जनम थान: चित बड़ागाँव, बलिया, उत्तरप्रदेश
रचना: बलिया-बहार, बलिदानी बलिया, फुलडलिया

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