भूप द्वारा बाज़त बधाई रे, हाँ रे बधाई रे,
भये चार ललनवाँ॥
राजाजी लुटावे हाँ अन धन सोनवाँ,
हाँ अन धन सोनवाँ, कोसिला लूटावे घेनु गाई॥
भये चार ललनवाँ॥
झाँझ मृदंग हाँ दुन्दभी बाजे,
हाँ दुन्दभी बाजे, ढोल संख सहनाई॥
भये चार ललनवाँ॥
सब सखि हिल-मिल मंगल गावे,
हाँ मंगल गावे, नयन जल भरी आई रे॥
भये चार ललनवाँ॥
रामचन्द्र! हाँ लनल-छबि निरखे,
हाँ लखन छबि निरखे, जुग-जुग जिये चारो भाई॥
भये चार ललनवाँ॥
लेखक परिचय:-
नाम: रामचन्द्र गोस्वामी

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