सरगम-सरगम गूँजे गीत के लहरिया,
पोर-पोर बाजि उठे, प्रीत के बंसुरिया।
लय पऽ लय बांधि गइल छंद-छंद ढल के,
ताल-ताल पऽ लहरे, कंठ से निकल के,
जिनिगी में ठहरि गइलि छनभर उमिरिया।
पोर-पोर बाजि उठे…
ओठन पऽ थिरकि उठे सुर साधना के,
सांस-सांस पर डोले भाव वंदना के,
तन-मन पऽ छिटकि गइलि जइसे अँजोरिया।
पोर-पोर बाजि उठे…
रूप के घटा घेरे, मन टेरे सावनी,
छेड़ि गइलि चुपके मधुर राग रागिनी,
पंचम सुर बोलि उठे जइसे बिजुरिया।
पोर-पोर बाजि उठे…
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लेखक परिचय:-
नाम: भोलानाथ गहमरी
जन्म: 19 दिसंबर 1923
मरन: 2000
जन्म थान: गहमर, गाजीपुर, उत्तरप्रदेश
परमुख रचना: बयार पुरवइया, अँजुरी भर मोती और लोक रागिनी

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