नारी: प्रकृति की अमूल्य रतन - उमेश कुमार राय

नारी केवल जीवन के दाता ना हई, ऊ आपने-आप में सृष्टि के हरेक गुण के समाहित स्वरूप हई। उनकर हर काम,हर विचार आ हर छुअन जीवन के एगो नया अर्थ आ नया दिशा देला जवन उनकर चुपी सधले निर्बाध रुप से समाज के सकारात्मक दिशा में बढ़ावे वाला प्रेरणादायक, सृजनात्मक आ जीवनदायी होला। एहिसे नारी के धरा प सहेज के सम्मानपूर्वक नेह-छोह और से से राखे के दायित्व हर पृथ्वीवासियन के बा। जइसे हर पृथ्वीवासियन खातिर धूप जीवनदायी होला ओसहीं नारी मानव जाति के अस्तित्व के धरोहर बाड़ी काहेकि ई आपन आंचरा में सुख,दुख आ वात्सल्य के त्रिवेणी के समेट ले रहेली जवन कतनों फाफात-उफनात रहेला बाकिर आंचरा के सीमा भेदन करे के ओकरो बूता ना होला। एहिसे एह आंचरा के शरण में विष्णुजी,राम-कृष्ण बन के शरणागत भइलन। अनसुहिया के एही आंचरा के प्रताप से ब्रह्म,विष्णु आ महेश अबोध बालक बन के रहे प मजबूर भइलन।

एगो सुनर आ सुव्यवस्थित परिवार में सुसंस्कार के गाछी पनपेला जवना से परिवार में सुख-सवृद्धि आ शांति के फल परिपक्व होला जवन मकान के सुव्यवस्थित घर में बदलेला आ तब एगो साधारन घर भी स्वर्ग बन जाला आ स्नेह-पेयार के बरसात होला ना त अलिशान महल पेयार- स्नेह आ शांति के आभाव में काटे धावे ला जवन जीते -जी नरक के एहसास करावे ला। एही से कहल जाला कि इहवे स्वर्ग आ नरक बा। सुव्यवस्थित परिवार के संरचना कइल आज के जुग में ठटे बात नइखे एकरा खातिर घर के मालिक के बहुत तेयाग आ तपसेया करे के पड़ेला। सभ बड़-छोट प निष्पक्ष रूप से बराबर धेयान देवे के पड़ेला।

परिवारिक संरचना के सुदृढ बनावे में नारी शक्ति के अहम भूमिका होखेला। नारी के बहुत रुप होखेला।ई मतारी,बहीन,बेटी,पतोह, आजी,दादी,नानी नातिनी आदि सम्बन्ध के बाखूबी से सवारे ली। नारी घर के खराब वातावरन के सवारि के स्वर्ग जस बनावे के सामर्थ

रखे ली ना त आपना प आ जास त महाभारत करा के बड़-बड़ महारथीन के भी विनाश करा सके ली।इहे देश प आफत आइल त लक्ष्मी बाई भी बन के देश के आन बचवली।ई परिवार खातिर आतना गिहथिन होला लोग कि लुगरी गांथ के घर सवांर लेली । एही से नारी घर के लक्षमी कहल जाली। कुंवारे से बढ़िया घर-वर खातिर नारी सोमवारी-व्रत करे शुरु करेली फिरु आपन बेटा खातिर जिउतिया ,आपन सवांग खातिर तीजव्रत ,भाई खातिर भइया-दूज,घर में बरकत खातिर तरह-तरह के पूजा पाठ करेली । अगर सही मयने में देखल जाए त सनातनी परम्परा के ध्वज वाहक भी बाड़ी काहेकि विश्व के कवनों कोना में रहेली त आपन धरम आ परम्परा के श्रध्दा ने निभावे ली।अपन परिवार के आगे बड़ावे खातिर हर तरह के अधामत करेली ।आपना खातिर कवनों आधामत ना करेली। तबहूं पुरुष प्रधान समाज में इनका हक के अनुरुप आदर ना मिले ला। हद त तब होला जब होत फजिरे से घरूआरी में लागेली आ खाना-खाए के समय प कवनों आगन्तुक आ जाले त आपन खाना खिला के अपने उपासे रह जाली बाकिर केहू के भनको ना लागे देली एहि से नारी अन्नपूर्णा भी कहाली।

प्राचीन ग्रंथन में नारी के बहुत सम्मानीय स्थान दिहल गइल बा।नारी बिना धरती प मानव जाति के कल्पना भी ना हो सकेला। ई मानव जाति जनमदाता हइ।एही से प्राचीन ग्रंथन में नारी के बहुत सम्मान दिहल गइल बा। इनकर पूजा करेके बात कहल बा।प्राचीन ग्रंथ में लिखल बा कि -

" यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता "

अर्थात -जहवां नारी के वंदनीय मानल जाला उहवां देवता के वास होखेला। हमार मतलब बा कि जवना घर-परिवार में नारी के सम्मान देल जाला उहवां शांति आ सद्भाव रहेला जवना से सुख आ समृद्धि आवेला। समृद्धि से कृति बनेला जवना से चिरकालिक सामाजिक प्रतिष्ठा बनेला काहे कि ग्रंथन में लिखल बा-" कृति यस्य सः जीवति। अर्थात जेकर कृति होखेला ओकरा मरला के बादो ओकर नाम जीवित रहेला।

पुरुष प्रधान समाज बना के नारी प ढेरो कुरीति थोपल गइल जवन ऊ शिक्षा के आभाव के कारण रहल। आज जब समाज आपना शिक्षित कहे लागल त समाज में नारी के समाजिक,आर्थिक,वैचारिक स्वतंत्रता प्रदान करके पुरुष लोगन के बराबर अधिकार मिलल। नारी प थोपल समाजिक कुप्रथा के सरकार कानून बना के नष्ट करत बा। नारी के सम्पति के समान आधिकार मिलल। तीन तलाक,हलाला हटल। नौकरी में आरक्षण मिलल। शिक्षण के क्षेत्र में प्रोत्साहन खातिर खातिर आर्थिक मदद मिल रहल बा।

नारी भी हर मुकाम प आपना के श्रेष्ठ सावित कर रहल बाड़ी। IAS,lPS , सेना आ राज्य पुलिस बल में बड़े-बड़े पोस्ट प बिराज मान हो के नारी गौरव बढ़ा रहल बाड़ी। हाल ही में ऑपरेशन सिन्दूर में अहम भूमिका निभा के देश के गौरव बढवली। ई लेखक,कवि,मोटिवेटर,गायिका,नेता सभे भूमिका में सफल बाड़ी। देश के सर्वोच्च पद प्रधान मंत्री आ राष्ट्रपति के पद के भी शोभा बढ़वले बाड़ी। तबो महादेवी वर्मा नारी के अबला काहे बतवली हमरा मगज में आज तक ई बात ना आमाइल। रानी लक्ष्मी बाई त बहुत बड़हन युद्धा रहली जवन अंग्रेजन के खूबे पछड़ले रहली। इनकर आपना जबाना में कइगो रण डंका बजवली तबो महदेवी वर्मा नारी के अबला का देख के बतवली , ई बात आज तक हमरा मगज में ना आमाइल।

नारी के आंचरा अथाह वात्सल्य होला। इनकर शांत आ निश्छल आंख समुदर जस सुख-दुख के आन्हघा मोतियन से भरल बा जवन इनका अस्तित्व के भूत-वर्तमान के वेदना आ आनन्द के असंख्य लहर उफान मारत रहेला आ आपन दम तोड़ के आंसुअन के पवनार बन के बहत रहेला बाकिर का मजाल जे वात्सल्य प तनिकों आंच पहूचा सको। नारी जीवन धन्य ह।
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उमेश कुमार राय
जमुआँव,भोजपुर (बिहार)।

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