नारी: प्रकृति की अमूल्य रतन - उमेश कुमार राय
नारी केवल जीवन के दाता ना हई, ऊ आपने-आप में सृष्टि के हरेक गुण के समाहित स्वरूप हई। उनकर हर काम,हर विचार आ हर छुअन जीवन के एगो नया अर्थ आ नय...
नारी केवल जीवन के दाता ना हई, ऊ आपने-आप में सृष्टि के हरेक गुण के समाहित स्वरूप हई। उनकर हर काम,हर विचार आ हर छुअन जीवन के एगो नया अर्थ आ नय...
रोपेया के चमक-दमक जब आपन रुप देखावे ला त मति फिरि जाला,आंखि प गुरुर के छोपनी चढ़ि जाला,मति उलुटा हो जाला आ मन बेलाम घोड़ा बन जाला।बड़का- बड़...