कवने सुगना पे गोरी तू लुभा गइलू हो।
कवने सुगना पे…
उड़ि-उड़ि ऊँचे अकसवा में बोले,
पंख पसारे पवन संग डोले,
अइसना से नेहिया लगा गइल हो।
कवने सुगना पे…
प्रीति के रीति जे ना किछु जाने,
ना जियरा के दरद पहिचाने,
ओकरे पऽ जिनिगी लुटा गइलू हो।
कवने सुगना पे…
बस में रहे ना तोरी चढ़ली उमिरिया,
बेदरदी नाहीं लिहलें खबरिया,
सगरे तू जोग भुला गइलू हो।
कवने सुगना पे…
गीत-गजल जेके भजन न भावे,
एक निरमोही तोरा मन भरमावे,
छन में गहमरी छला गइलू हो।
कवने सुगना पे…
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लेखक परिचय:-
नाम: भोलानाथ गहमरी
जन्म: 19 दिसंबर 1923
मरन: 2000
जन्म थान: गहमर, गाजीपुर, उत्तरप्रदेश
परमुख रचना: बयार पुरवइया, अँजुरी भर मोती और लोक रागिनी

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