चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह: भोजपुरी के समर्पित साहित्यकार - डॉ रामजन्म मिश्र

बहुत कठिन काम हऽ आपन जन पर संस्मरण लिखल। ऊ काम अउर कठिन हो जाला जब संबंध लगभग चालीस साल पुरान होखे। दूर रहके भी संबंध बनावल राखल आ ओकरा के सहेजल बड़हन काम हऽ। चौधरी जी से लगभग ४५ साल के जान पहचान रहे जे जीवन का अंतिम समय तक बनल रहल। एह संबंध के निर्वाह चौधरी जी का निधन का बाद भी बड़ा नीमन आ आदर का संगे उहाँ का बड़ लरिका कनक किशोर जी निभावत बानी। ई चौधरी जी से मिलल संस्कार के प्रभाव हऽ।
चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह जी से पहिलका भेंट प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में हिरनपुर में ओह घरी के विधायक साइमन मरांडी का आवास पर भइल रहे। महाजनी प्रथा शोषण आंदोलन के अगुआ विधायक का बोलाहट पर चौधरी जी उनका आवास पर आइल रहीं। हमनी के पहिले से उहां बइठल रहनीं। विधायक जी चौधरी जी के बारे में पहिले से कहत रहनीं कि बड़ा अखड़ है। नमस्कार कर चौधरी जी बइठ गइनी। छुट्टी के दिन रहे। विधायक जी से मुखातिब होके कहनीं 'कहल जाव माननीय'। कुछ समस्या पर बात भइल। कुछ पर सहमति आ कुछ पर असहमति चौधरी जी प्रकट कइनीं। विधायक जी कहनीं कि मिसिर जी इहाँ का भी आरा के बानीँ। चौधरी जी ई कहते निकल गइनीं कि डेरा पर आयीं। विधायक जी का आवास का नजदीके चौधरी जी का आवास आ कार्यालय रहे।
साहिबगंज में दूसरका भेंट चौधरी जी से भइल। ई भेंट बड़ा मनगर, जीवन्त, साहित्यिक भेंट भइल जवना से आजीवन संबंध के मजबूत नींव पढ़ल। स्थान रहे आचार्य शिव बालक राय जी तत्कालीन प्रधानाचार्य साहिबगंज महाविद्यालय का आवास 'तमसा तीर्थम'। ओह घरी हम महाविद्यालय परिसर का 'दिनकर निवास' में रहत रहीं। संध्याकाल में 'तमसा तीर्थम' में आचार्य जी का शिष्य, मित्र, शिक्षक लोग के जुटान होखे। जनवरी १९७२ के महीना रहे। हरदिन का तरह ओह दिन आचार्य जी के हरदास जैन महाविद्यालय आरा के शिष्य डॉ जगन्नाथ ओझा, भौतिकी विभाग के प्रोफेसर गौरीशंकर शुक्ल, साहिबगंज सदर के प्रखंड विकास पदाधिकारी शालिग्राम मिश्र आउर की लोग रहे। बाहरी गेट पर आवाज आइल। ओह बइठकी में हमही सबसे उमिर में छोट रहनी। जाके गेट खोलनी तऽ एगो लमहर कद-काठी के आदमी जीप से उतरल। हम समझ गइनी कवनो पदाधिकारी हुए। हम कुछ कहती ओकरा पहिले आवाज आइल मिसिर जी। हम अचकचा गइनीइ। ऐहि बीच उहाँ के कहनी कि हिरनपुर में विधायक जी कीहां अपने के देखले रहीं। अद्भुत रहे चौधरी जी के स्मरण शक्ति। जाड़ा के दिन रहे सभे आग का लगे बइठल रहे। चौधरी जी भी वोह आग का लगे बइठ गइनीं आ बिना लाग लपेट के कहनीं कि आचार्य जी के दरशन करे खातिर आइल बानीं। शेष परिचय हम करा देनीं। चौधरी जी सभे से भोजपुरी में बात करत रहीं। ई जानत की आचार्य जी भोजपुरी भाषी ना हईं। आचार्य जी कहनीं कि हम बारह बरिस भोजपुर के नमक खइले बानीं, पानी पियले बानीं, बोलीं चौधरी जी भोजपुरी में। आचार्य जी कहनीं कि भोजपुर के करजा कम करे खातिर हम आपन बेटी के बियाह सिमरी में कइले बानीं पाहुन डॉ सुभाष राय बिहटा कालेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बाड़े। हमार आरा के निकट के शिष्य इहाँ के रामजन्म जी बानीं। अपने सभे बतिआईं हम संध्या कालीन पूजा तबतक करत बानीं। शालिग्राम मिश्र के घर भी आरा जिला बा। साहिबगंज में बड़ा आत्मीयता से बातचीत भइल। ओकरा बाद ई संबंध प्रगाढ़ होत गइल। संबंध जोगावे के आ सम्मान देवे के चौधरी जी जानत रहीं।
चौधरी जी के खूबी रहे कि सरकारी काम पूरा ईमानदारी से करत रहीं। किसान गृहस्थ परिवार से अइला के चलते गाँव - गरीब किसान मजदूर का खातिर बड़ा संवेदनशील रहीं।माई भाषा भोजपुरी के भंडार कइसे भरी ऐकरा खातिर बराबर चिंतित रहीं। पत्र से भा मिलला पर युवा लेखन के प्रोत्साहित करत रहीं। चौधरी जी का प्रोत्साहन के चलते हमार भाई सच्चिदानंद जी भोजपुरी भाषा साहित्य में नालन्दा मुक्त विश्वविद्यालय से एमए कइलन।
साहिबगंज महाविद्यालय के तत्कालीन प्रधानाचार्य आचार्य शिव बालक राय जी का समय साहिबगंज साहित्यिक गतिविधि के केन्द्र रहे। कालेज में 'मनोरंजन भोजपुरी परिषद' रहे। डॉ जगन्नाथ ओझा, शालिग्राम मिश्र, प्रोफेसर गौरीशंकर शुक्ल, प्रोफेसर ए.एफ.एम.ताहिर का सहयोग से साहिबगंज जिला भोजपुरी परिषद के गठन शहर में भइल आ आचार्य जी के संरक्षक बनावल गइल। चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह जी के भोजपुरी के प्रति प्रेम देख के कहनीं कि एगो भोजपुरी कवि सम्मेलन के आयोजन कइल जाय। चौधरी जी से फोन पर सलाह मिलल। उहाँ का कहनीं हम कवि सम्मेलन में आइब आ सहयोगो करब।एही बीच एगो घटना घटल। आचार्य महेंद्र शास्त्री जी के भतीजा श्री अनिल कुमार पाण्डेय भा.आ.से.आरक्षी अधिक्षक बनके साहिबगंज आ गइनीं। भोजपुरिया समाज के लोग के बड़ा खुशी भइल। आचार्य महेंद्र शास्त्री जी साहिबगंज अपना भतीजा एस पी से मिले खातिर आ गइनीं।उहाँ का जानत रहनी कि हम साहिबगंज कालेज में बानीं। एगो सिपाही का साथे आवास पर आ गइनीं। समाचार भइला के बाद शास्त्री जी कहनी कि प्रधानाचार्य शिव बालक राय जी किहां चलीं उहाँ का बारे में हिंदी के विद्वान लोग चरचा करेला। बड़ा मिलनसार आ साधु स्वभाव के उहाँ का हीं। शास्त्री जी सारे आचार्य जी के आवास तमसा तीर्थम में पहुंच गइनीं। बहुत देर तक साहित्यिक चरचा भइल। २३ अप्रेल का कार्यक्रम के चरचा भइल। आचार्य शास्त्री जी आ चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह जी के कवि साहित्यकार के बोलावे के दायित्व दिआइल।
२३ अप्रेल १९७२ आ गइल। चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह कार्यक्रम बनावे खातिर आ गइनीं। २३ के एक रात पहिले आचार्य शिव बालक राय जी के आवास पर स्थानीय लोग के बइठकी भइल जवना में चौधरी जी आ शास्त्री जी विशेष रूप से रहीं। आचार्य महेंद्र शास्त्री जी का बोलाहट पर बिहार के तत्कालीन वित्त मंत्री श्री दारोगा प्रसाद राय जी के आवे के सूचना मिलल तऽ बड़ा खुशी भइल। आचार्य शिव बालक राय के नेवता पर उहां के शिष्य आ विद्वान रामेश्वर नाथ तिवारी, राजेंद्र कालेज छपरा के प्रधानाचार्य आ कवि मुरलीधर श्रीवास्तव आ रहल बानीं, ई जान समिति के सदस्य लोग आनंदित हो गइल। चौधरी कन्हैया जी का नेवता पर 'अंजोर' भोजपुरी पत्रिका के संपादक पांडे नर्मदेश्वर सहाय, कौशिकायन के कवि अविनाश चंद्र विद्यार्थी, प्रो. धीरेन्द्र प्रसाद धवल के आवे के पक्का जानकारी मिलल तऽ आयोजक के प्रसन्नता बढ़ गइल।
सम्मेलन से एह बात के पता चलल कि चौधरी जी में साहित्यकारन के सेवा के भाव भरल बा‌। लगभग आधा रात के अपर इंडिया एक्सप्रेस पटना से साहिबगंज में आवत रहे। कुछ नवही कार्यकर्ता के संगे स्टेशन जा के अतिथि साहित्यकार के ले आवे के रहे। स्टेशन हम पहुंचनी त देखत बानीं कि चौधरी जी पहिलहीं से हाजिर बानीं। सरकारी पदाधिकारी भइला के बादो चौधरी जी में तनिको पद के अभिमान ना रहे।
वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव के तैयारी में आचार्य शिव बालक राय अपना टीम के साथ लागल रहीं। मुख्य अतिथि दारोगा प्रसाद राय जी समय से आ गइनीं। उहां के वन विभाग के विश्रामागार में ठहरावल गइल। साहित्यकार अतिथि लोग के कालेज के पास में शिव निकेतन में ठहरे के व्यवस्था भइल।
नियत समय पर पहिलका सत्र शुरु भइल। वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव मनावे के संगे 'भोजपुरी भाषा आ साहित्यक विकास' पर चरचा भइल। उद्घाटन भाषण माननीय मंत्री दारोगा प्रसाद राय जी देनीं। भोजपुरी भाषी ना होखला के बादो आचार्य शिव बालक राय जी भोजपुरी में स्वागत भाषण कइनीं। आयोजन में शामिल विभिन्न विद्वान भोजपुरी भाषा आ साहित्य पर आपन विचार रखलन लोग।पहिला सत्र के धन्यवाद ज्ञापन आचार्य महेंद्र शास्त्री जी कइनीं।पहिलका सत्र के सफलता से लोग बड़ा प्रसन्न रहे। भोजपुरी गैर भोजपुरी छात्रन का संगे गाँव जवार से भी भोजपुरी भाषी लोग जुटल रहे। दोसरका सत्र रात आठ बजे शुरू भइल। कवि सम्मेलन के उद्घाटन आरक्षी अधीक्षक अनिल पांडेय जी कइनीं। अध्यक्षता आचार्य शिव बालक राय जी कइनीँ। कवि पांडेय नर्मदेश्वर सहाय, अविनाश चंद्र विद्यार्थी, धीरेन्द्र धवल, महेंद्र शास्त्री का बाद चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह जी के कविता पाठ के बारी आइल। चौधरी जी जब कविता पढ़ें लगनी त श्रोता लोग काफी आनंदित भइल आ ताली पर ताली बाजे लागल। चौधरी जी विभिन्न छंदन में कविता पढ़नीं। उपदेश से भरल दोहा जब चौधरी जी पढ़ें लगनीं त आउर पढ़ी आउर पढ़ी के आवाज आवे लागल। चौधरी जी के पढ़ल एगो दोहा आजो इयाद बा।
माय बाप के साग ना, बेटा दुर्गादास।
मइल हाथ के संपत्ति, रहे न केहू पास।।
कवि सम्मेलन के सफल बनावे में चौधरी जी के बहुत बड़हन योगदान रहे।कवि सम्मेलन के संचालन डॉ जगन्नाथ ओझा कइनीं। साहिबगंज के ओह कवि सम्मेलन के भागीदार हम आ हमार छोट भाई सच्चिदानंद मिश्र बाड़े शेष कवि, अतिथि, लोग दिवंगत हो गइल बा।
अगिला दिन सभ लोग के विदाई कइल गइल बाकिर विदाई चौधरी जी ना लेनी आ कहनीं कि माई भाषा के प्रचार-प्रसार, सेवा हम करब बाकिर विदाई ना लेब। ई उदारता शेष कवि लोग में ना देखाईल।अइसन सहज सरल आदमी जे आपन खा के, आपन खिया के भोजपुरी भाषा के सेवा करत बा चौधरी जी रहीं। चौधरी हमनी का बीच नइखीं।उहाँ का स्मृति के नमन करत बानीं। सैंतालीस बरीस के संस्मरण लिखब त पोथा हो जाई।एह संस्मरण के समाप्त करत दू बात लिखे के चाहत बानीं कि चौधरी जी के बड़ बेटा कनक किशोर उहाँ के छोड़ल काम के पूरा ही नइखीं करत ओकरो से आगे बढ़के सब पुस्तकन के ग्रंथावली रूप दे देत बानीं। ई बड़हन काम भइल बा। कनक किशोर जी के बधाई। चौधरी जी साहित्य के मुल्यांकन नइखे भइल, होखे के चाहीं। चौधरी जी के नमन आ कनक जी के आसिरवाद।
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रामजन्म मिश्र 
साहिबगंज
प्रधान संपादक - 'माई'
उप कुलपति
विक्रमशिला विद्यापीठ
भागलपुर, बिहार। 
२-११-२०२०
मैना: वर्ष - 7 अंक - 120 (अक्टूबर - दिसम्बर 2020)

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