समय के चोट - विद्या शंकर विद्यार्थी

समय के चोट सुनले बानी, हम। कि देहात में जब कवनो मेहरारू के मरद के मन हो जाए त ई बात कह के ओह अबला बेचारी थूरे लागत रहे कि साग में हरदी काहे ना परल ह। अचरज के बात ई कि अइसन हाल आधा खाना खा के करत रहे। अबला बेचारी धूना के लोर पोंछ लेत रहे। 

हालाकि बात फैले से बाकी भी ना रहत रहे कि बेचारी अधकपारी के हाथे साग में हरदी डाले खातीर पिटाइल बिया। बाह रे मरद हर के खिस मेहरारू पर। घर के चैन से ना रहे देबऽ लोग। लोग कहता कि बधार से खेसारी चल गइल । काहे ना जाई खेसारी। ना जाई त अबलन के देह थुरवावे खातीर रही। ई इयाद ना रहेला लोग के कि पैर फाट के जब मुँह बिदोर देला आ बाथा ना बरदास होला त मेहरारूए ततारेलिनसँ । मेहरारू ना रहनसँ त गोड़ में चोंइटा छूटे लागी। हराठी ना मेटी। सागी में हरदी ना परल। आरे हरदी त अइसन पर जाई कि अलाइन हो जाई। कवर जे बा से कि भीतरे ना घोंटाई। जहाँ पनरहियन परल हरदी कि जौंडिस धर लिही आ कबार दिही। ढेर फरहर मरद बनल छुटुक जाई। डाकधर अलगे पइसा घिंची आ कही कि हरदी देने तिके के नइखे, तेल त एकदमे भूला जाए के बा। दोबारा रोग जन पलटे सदा आहार पर रहे के परी। ई ह मेहरारू के थूरे के मजा। 

कहीं नइहरा गइल त अपने हाथ जारे के परी। आ कहीं असकत ठेकी त सतुआ के लिबरी घोर के पीए के परी। कतना दिन केहू लिबरी पर टिकी जी। अंत में आपन हारल ससुरी जाके मेहरारू के लिआ लेआवहीं के परी। साली आ सरहज के जबाब देल मोसकिल हो जाई। ऊ अलगे तरह से नेवा दिही लोग। बाप रे बाप सागी में हरदी चलल बा लोग डलवावे। आरे भाई आउर त आउर चसकल साली बधारी में चढ़ा के लिआ जइहनसँ आ खेसारी के खेत में अझुरा के गिरा दिहनसँ। आ कहीं गिरे के खेसारी में आ गिर गइलऽ असके परती में त सब त ना बाकी दू चार गो दांत त बहरी गिरिए जाई। एतने ना जब दांत झर जाई त तय बा कि बोली बदल जाई। तवने साली पुछिहें लोग का ए पाहुन सागी में हरदी कइसन लागेला। तवना घरी भक मार दिही। इयाद आवे लागी आपन बेंजाय। छीपा पटकल आ लोटा बिगल सब बात सिनेमा के रिल नियन सोझा घुमे लागी। 

आदी के अँचार चल सकेला बाकि आदी के भभके ओल पर टूटे के मजा कुछ आउर हो जाई। मुँह हहुआए लागी। खँटाइओ खइला से ना पटिआई। आ अइसन स्वागत मेहरारू के मारे ओला के साली करेलिनसँ। सब सहसाबाँहु भइल छुटुक जाला। हँस के नजर मरिहनसँ आ एही बीच में जमीन पर ठिठिआ दिहनसँ। गनीमत इहे रहेला कि पंजरी के बाता ना कबरे।
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लेखक परिचयः
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास ( सासाराम )
बिहार - 221115
मो 0 न 0 7488674912 




मैना: वर्ष - 7 अंक - 118-119 (अप्रैल - सितम्बर 2020)

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