भोजपुरी ग़ज़ल - राज जौनपुरी

1. 

कुछ त बताईं हे राम लखन बाबू
लोर छुपाईं हे राम लखन बाबू

बूढ़ भइल अब बाबू महतारी तऽ
फ़र्ज़ निभाईं हे राम लखन बाबू

कर्ज़ से डूबल बाटे जिनिगी सउँसे
याद दिलाईं हे राम लखन बाबू

भाग गइल हरिया के लइकी देखीं
आग लगाईं हे राम लखन बाबू

डूब न जाये पगरी कतहूँ देखीं
बात दबाईं हे राम लखन बाबू

नार नवेली घर में दुलहिन आइल
इश्क़ लड़ाईं हे राम लखन बाबू

नींव पड़त बाटे आज पड़ोसी के
टांग अड़ाईं हे राम लखन बाबू

सास पतोहू के एहि लड़ाई में
बीच बचाईं हे राम लखन बाबू

बैर मिटावत बा 'राज' हिया से तऽ
हाथ मिलाईं हे राम लखन बाबू
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2.

दर्द हियरा से उठल तऽ ग़ज़ल हो गइल
लोर आँखिन से छुटल तऽ ग़ज़ल हो गइल

मोहमाया में जे तड़पत रहे रात-दिन
प्रान काया से छुटल तऽ ग़ज़ल हो गइल

तोहरा दिल पे जे हमरा हुक़ूमत रहे
राजे-दिल जब ई खुलल तऽ ग़ज़ल हो गइल

बात चिल्ला के हिया पे असर ना भइल
बात दिल से जे कहल तऽ ग़ज़ल हो गइल

ज़िन्दगी भर हम लुटावत महब्बत रहीं
प्यार में दिल ई दुखल तऽ ग़ज़ल हो गइल

रात सोचन में बितल जेकरा याद में
भोर मुखड़ा ऊ दिखल तऽ ग़ज़ल हो गइल

'राज' जिनगी के भरोसा भी नइखे रहल
प्रीत जिनगी से रुसल तऽ ग़ज़ल हो गइल
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साहित्यिक नाम : 'राज जौनपुरी'
मो. 9451359936
सम्प्रति : सहा. अध्यापक (अंग्रेजी )
2/162 एल आई जी, आवास विकास कॉलोनी
योजना-3, झूँसी, प्रयागराज (उ. प्र.)
पिनकोड - 211019




मैना: वर्ष - 7 अंक - 118-119 (अप्रैल - सितम्बर 2020)

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