शिला पर हठ के अतहत रेख - विद्या शंकर विद्यार्थी

माई एतना बड़ तूँ ले लिहलु बददुआ 
माई के छाती सेत ना फूट गइल भुआ।

माई, हमरा आ भइया में का भेद पइलु
शिला पर हठ के अतहत तूँ रेख उगइलु
नागिन डँसे से कम नइखे साँपिन भइलु
कहइलु माई ना बलुक तूँ परमिन भइलु
परमिन भी अइसन ना करे जे तूँ कइलु।

क्रोध से जन तिकऽ विरोध के स्वर जान 
मांगल गद्दी राज दूनों बाटे बिख समान।

कुश के चटाई भुआँ बिछा के रह लेब 
भइया सहिहें तकलीफ त हमूँ सह लेब 
माई एतना बड़ तूँ ले लिहलु बददुआ 
माई के छाती सेत ना फूट गइल भुआ। 
(ननिहाल से लौटते भरत के सवाल)
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लेखक परिचयः
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास ( सासाराम )
बिहार - 221115
मो 0 न 0 7488674912

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