केहू के केहू इहँवा चिन्हात नइखे - विद्या शंकर विद्यार्थी

थाह चले लागल लोग बदले लागल
केहू के केहू इहँवा चिन्हात नइखे
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे।

केहू छतवे से झांके सड़किया के ओर
चाहे जानल ना काहे बा नयना में लोर
केहू केहू के इहँवा सोहात नइखे।
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे॥

केहू खोंखत नइखे केहू बोलत नइखे
कंठ चाहीं खोले के तऽ खोलत नइखे
केहू के केहू इहँवा जोहात नइखे।
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे॥

लइकी के लोग चिड़िया समुझत बाटे
खास आबरु के आबरु बस बुझत बाटे
केहू के केहू इहँवा मोहात नइखे।
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे॥

साँझ के झोली परते राह रूक जात बा
हिफाजत के भय से लोग छुप जात बा
केहू के केहू इहँवा सोहात नइखे।
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे॥
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लेखक परिचयः
नाम: विद्या शंकर विद्यार्थी
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास (सासाराम )
बिहार - 221115
मो. न.: 7488674912

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