अब वतन के आग बुताइल - विद्या शंकर विद्यार्थी

अब वतन के आग बुताइल कश्मीर के ओह घाटी के
सरधा से हम शीश झुकावत बानी आज ओह माटी के।

कतना लाल माई के रहले कि शीश बलिदान चढ़वले
जय जवान के नारा दिहले आ राष्ट्र के गान कढ़वले
चलत रहल एतना दिन शासन पीर करेजा में साटी के
अब वतन के आग बुताइल कश्मीर के ओह घाटी के।

जवन माई लाल गँवइली नीर अँचरा से पोंछ लिहली
बबुआ खइले छाती प गोली पीर करेजा खोंस लिहली
ऊ माई आज बिहँसत बाड़ी लाल गँवा के आँटी के
अब वतन के आग बुताइल कश्मीर के ओह घाटी के।

जे धधकाई आग उहाँ त ओही आग में झोंका जाई
फूँके के सोची घर केहू त फूँके से पहिले फूँका जाई
तिके से पहिले तिक दिआई गुन हउए एह माटी के
अब वतन के आग बुताइल कश्मीर के ओह घाटी के।
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लेखक परिचयः
नाम: विद्या शंकर विद्यार्थी
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास (सासाराम )
बिहार - 221115
मो. न.: 7488674912

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