बास्तुदोख - दिनेश पाण्डेय

कुछ त फरक बा
दुनो मूरतियन का मधे
तबे त?

बेहिसाब उम्मीदन के अलम पोसपूत कुरहनी
चले बेफाँट
ओह बाप के का?
अधरतिया के जसन से बिमुख
तन से जादे मन से थाक चुकल बूढ़
कर गइल 'सत्य' के सफल 'शोध'
जेकर 'अनुप्रयोग' अपूरन बा अब तक
तहिआवल तलघर में,
धूर के मोट परत,
मकरीजाला,
बिसकुतिया के लेंड़ी बीच,
बाकि कुछ त बा एह मूरत में बिसेख,
नजर परते सिर झुक जाला,
ओकरो, जे बूढ़ा के मुखौटा पेन्ह के
सरबस खुटचालि चलल,
कइलस कुकरम,
ओकरो, जे चउल कइल छिब काढ़ल,
ओकरो,
जे हाथ जोरल माथ नावल आ गोली मार देल,
ओकरो,
जे टूट के बिखरल चस्माँ के सीसा के पार झाँकत
देखऽता भाँगल सपनलोक,
रोअता जार-बेजार।

जब कबो बाजेला भोंपू
थम जाला सारा आलम, स्तब्ध।
मूरतवत,
माथ नँव
आँखि नम।
सिलसिला जारी बा अब ले।

एहू मूरत प कउआ हगे से बाज ना आवस
बाकि ई त पथराह आकीरति ह।
तेकर पाछू से उभरत मुखदीपति ओहरल ना।
जतिने गहिरोर देखीं
रोशनी तेजे होत जाला।
ए से चौराहा आबाद बा, अबो ले।
कुछ त बिसेख बा एह मूरत में।

दोसरकी मूरत रहे हाल तक
नियरे का नगर में-
जीत के गरब से अलगल छाती,
धिरावत अँगुरी,
घमंडे आकास के ओछा बूझत कौड़िया आँखि,
खउफ पैदा करत बकरदाढ़ी,
डरे चिरइयों ना बइठत रहीसँ ओकर कान्हें।
ओकर असर नकारा रहे का त।
तबे त।
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लेखक परिचयः
नाम: दिनेश पाण्डेय,
आवास संख्या - 100 /400,
रोड नं 2, राजवंशीनगर, पटना - 800023.
मो. न.: 7903923686

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