देवरू के सँगवा - सुरेश कांटक

महुआ बीनन नाहीं जा इब ए रामा / देवरू के सँगवा
पीयवा के गाँव ही बोलाइब ए रामा / देवरू के सँगवा

कुछ महुआ बीने देवरा कुछ देखे छतिया
हँसि हँसि करे हमरा से हरदम बतिया
महुआ में अगिया लगाइब ए रामा / देवरू के सँगवा ............।

पुरवाई बहेले सिहरि जाला देहिया
पियवा निदरदी से जुड़ि जाला नेहिया
आधे पेट भले हम खाइब ए रामा / देवरू के सँगवा .............।

पापी पेट दिहलस पिया के बियोगवा
राजावा के लागल खाली बोलहीं के रोगवा
उनुको के सबक सिखाइब ए रामा / देवरू के सँगवा .............।

कांटक रहित गँउवें में कारखानावा
इहँवे कम इतें लागित सभके मनवा
मीलि जुलि सभके बताइब ए रामा / देवरू के सँगवा .....................।
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लेखक परिचयः
नाम: सुरेश कांटक
ग्राम-पोस्ट: कांट
भाया: ब्रह्मपुर
जिला: बक्सर
बिहार - ८०२११२

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