टूटलऽ पलानी बा - शिवपूजन लाल विद्यार्थी

गली कूंची, घर आंगन, भइल पानी पानी बा,
आइल बरसात पिया, टूटलऽ पलानी बा।

गरजेला मेघा अरु कड़के बिजुरिया,
बड़ा भकसावन लागे रतिया अन्हरिया।
अॅंखियाअस टप टपचुअत ओरियानी बा,
आइल बरसात पिया, टूटलऽ पलानी बा।

बरऽखता पानी जब मिलेना सरनवॉं,
रेंगऽताटे सॉंप गोजर घरवा अॅंगनवा।
दूर बाड़ऽतू का जानऽ, कवन परेसानी बा?
आइल बरसात पिया, टूटलऽ पलानी बा।

कइसे छवॉंई घर, पईसा ना कउरी?
कवन अधामत करीं, कहां कहां दउरीं?
दुखवाअभाव बनल जिनिगी कहानी बा,
आइल बरसात पिया, टूटलऽ पलानी बा।

सखिया सहेली सब गावेली कजरिया,
झुलुवा लागलऽ बाटे, अमवाके डरिया,
जेकर पिया साथे ओकर चानी बस चानी बा,
आइल बरसात पिया, टूटलऽ पलानी बा।

बेंगवा के टरऽ टरऽ जियरा डेरावेला,
पपीहा के पीहू पीहू निंदिया उड़ावेला,
बरऽसता सावन, हम्मर तरसत जवानी बा,
आइल बरसात पिया, टूटलऽ पलानी बा।

लहऽलहऽ चहऽचहऽ लागे फूल बगिया,
गछवा बिरिछिया के सॅंवरल जिनिगिया,
हमरा जिनिगिया में पसरल बीरानी बा,
आइल बरसात पिया, टूटलऽ पलानी बा।
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शिवपूजन लाल विद्यार्थी

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