मुन्नर बाबा - प्रभाकर पांडेय

मुन्नर बाबा कवनो जयोतिसी ना हउअन ना कथा बाँचेवाला पंडित। मुन्नर बाबा तS एगो साधारण गँवई हउअन। उनकी लगे दु-चारी कठा खेत बा। बस ओही में अझुराइल रहेने अउरी खाए-पीए भरी के कवनोगाँ उपजा लेने।

मुन्नर बाबा के घर चमरटोली में बा अउरी इ चमरटोली गाँव की उत्तर में बा। गाँव में केहु की घरे विआह-सादी होखे उ मुन्नर बाबा के जरूर इयाद करेला। आ इयाद काहें ना करो भाई, जवले मुन्नर बाबा आपन टुमकी-नगाड़ा नाहीं ले के अइहें, माँगर कवनेगाँ पूजाई? हम देखले बानी की घर के मेहरारू गीत गावत पहिले मुन्नर बाबा की टुमकी-नगारा के पूजा करेनी कुली; ओकरी बादे अउरी कवनो काम सुरु होला।
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कबो-कबो जब गाँव में एके समय दु-तीन घरे विआह-सादी पड़ी जाला तS मुन्नर बाबा सबकी घरे जा-जा के आपन टुमकी-नगाड़ा बजा देलें। घर में से जब दुलहा अउरी ओकरी पीछे-पीछे गीत गावत मेहरारू निकलीहें कुली तS संगे-संगे मुनरो बाबा टिमटिमावत निकलिहें। कबो-कबो तS कवनो लइका मुन्नर बाबा से उनकर टुमकी-नगारा बजावे के माँगी अउरी लंठई में कस के बजा के फोड़ी दी तS मुन्नर बाबा खाली एतने कहिएँ की इ का कइलS ए बाबू। चल तोहरी घरे अब ओरहन दे तानी।

सम्मती जरावे की दिने तS रातीखान जब मुन्नर बाबा आपन टुमकी-नगारा बजावत ओही टोला से चल दिहें तS लोग के पता चली जाई की अब सम्मती फुँकाए जाता।
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अब धीरे-धीरे मुन्नर बाबा बुढ़ात जा ताने अउरी उनकर टुमकी-नगारा बजावल कम होत जाता। आजु बहुत कम लोग उनुके अउरी उनकरी टुमकी-नगारा के इयाद करता जवने की बजह से उनकरी घर-परिवार में कवनो मनई इ टुमकी-नगारा बजावे के काम नइखे कइल चाहत। मुन्नर काका की संघे-संघे अब उनकर टुमकी-नगड़ो उपेछित हो गइल बा अउरी इ परमपरो। अब तS लोग मुन्नर बाबा के बोलावतो नइखे। बैंड, ढोल आदि बजवा के माँगर पुजवा लेता चाहें अउरी कवनो अनुस्ठान करवा लेता।
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मुन्नर बाबा आजु बेचैन बाने गाँव में इ बदलाव देखी के। उनकरा दुख बा की पहिले के लोग कहत रहल हS की जा मुन्नर के बोला ले आवे, मांगर पुजले के समय हो गइल बा अउरी आजु के लोग कहता की मुनरा के बोलवले के कवनो ताक नइखे, उ नाहीं आई तबो माँगर पुजइले बिना बाकी रही??? गाँवभरी के लोग-लइका उनके मुन्नर बाबा, मुन्नर बाबा कइले रहत रहल हS लोग अउरी आजु उनकर सुधी लेबेवाला केहु नइखे।
एइसन बाती नइखे के पहिलहुँ मुन्नर बाबा के टुमकी-नगारा बजवले से उनकर खरचा-पानी चलत रहल हS??? अरे लोग उनके बीस आना अउरी सीधा-उधा दे देत रहल हS अउरी ओतने पर मुन्नर बाबा खुस रहत रहने हँS,पर उनकरा इ काम कइले में बहुते खुसी महसूस होत रहल हS। ए परमपरा के निरवाह कइल उ आपन जिम्मेदारी समझत रहने हँS अउरी मन लगा के इ काम करत रहने हँS। मुन्नर बाबा की इयाद बा की ऊ बहुत छोट रहने तS अपनी बाबा के संघे जाँ अउरी अपनी बाबा के टुमकी नगाड़ा बजावत देखें ओकरी बाद उनकर बाबूजीओ बजावल सुरु कइने अउरी मुनरो बाबा।
आजु गाँव सहर हो गइल बा अउरी मुन्नर बाबा के फाटल टुमकी-नगारा मड़ई की एगो कोने में धइल आपन पुरनका गाथा इयाद कS रहल बा।
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मुन्नर बाबा - प्रभाकर पांडेयलेखक परिचय:-
नाम: प्रभाकर पांडेय
जन्मतिथि- 01.01.1976
जन्मस्थान- गोपालपुर, पथरदेवा, देवरिया (उत्तरप्रदेश)
पिता- स्व. श्री सुरेंद्र पाण्डेय
शिक्षा- एम.ए (हिन्दी), एम. ए. (भाषाविज्ञान)

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