अचके में आ के - केशव मोहन पाण्डेय

अचके में आके मुआवेलू हमके।
तू ही गमवा देलू, दवा देलू गम के।

चमक बा वदन पर, बदन बाटे पातर
अँखिया बा भन्टा, बा मुँहवा टमाटर
फरिहरी लागल बा, लागल ना झमड़ा
गतर साग सउना, गतर फूल के लातर।
चटक लिहले बोली, पानी आलू-दम के।

डॉक्टर कहले, बाबा देऽखें पतरा
मधुमेह धइले बा, घेरले बाऽ खतरा
हमरा लागे लोगवा एक नम्बरी झूठा
तहरा के देखी तऽ बन गइल जतरा।
बचा लऽ भरम तू, हमरा भरम के।

काहें ना आजुओ केहू के बुझाइल
पिरितिया ह अर्पण, ह लूटल-लुटाइल
अँगना के कोना में तुलसी के पूरवा
मानल-मनावल, मनलो पर कोन्हाइल।
अँखिया में सपना, चान बन ऊहे चमके।

अगराइल बानी, ओढ़ नेहिया के चादर
उमसल सरेहवा में बुनिया, तू बादर
हियरा के नियरा तू दियना जरवलू
तहरा पिरितिया से बढ़ल मोर आदर।
नेहिया लुटावऽ, ना धमकी दऽ बम के।
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लेखक परिचय:-
नाम - केशव मोहन पाण्डेय
2002 से एगो साहित्यिक संस्था ‘संवाद’ के संचालन।
अनेक पत्र-पत्रिकन में तीन सौ से अधिका लेख
दर्जनो कहानी, आ अनेके कविता प्रकाशित।
नाटक लेखन आ प्रस्तुति।
भोजपुरी कहानी-संग्रह 'कठकरेज' प्रकाशित।
आकाशवाणी गोरखपुर से कईगो कहानियन के प्रसारण
टेली फिल्म औलाद समेत भोजपुरी फिलिम ‘कब आई डोलिया कहार’ के लेखन
अनेके अलबमन ला हिंदी, भोजपुरी गीत रचना.
साल 2002 से दिल्ली में शिक्षण आ स्वतंत्र लेखन.
संपर्क –
पता- तमकुही रोड, सेवरही, कुशीनगर, उ. प्र.
kmpandey76@gmail.com

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