पिया नाहि अइलें - सुरेश कांटक

चढ़ल चइत उतपतिया ए रामा ,
पिया नाहि अइलें

महुआ फुल इले आमवा टिकुर इले
पिया नाहि अ इले त मन मुरझ इले
केकरा से कहीं दिल के बतिया ए रामा ,
पिया नाहि अइलें

कहलें सजनवा ना कबहूँ भुलाइब
तहरा के हियरा में हरदम बसाइब
बिसरे ना उनुकर सुरतिया ए रामा ,
पिया नाहि अइलें

रतिया ना आवे नीन दिनवा हेराइल
कहँवा दो मनवा के सुगना लुकाइल
बलमू क इलें बड़ घतिया ए रामा
पिया नाहि अइलें

जुगुत कवन करीं तनी ना बुझाला
फोनवो प बोलिया ना उनुकर सुनाला
धक धक धधकेला छतिया ए रामा ,
पिया नाहि अइलें

कांटक सजनवा के जलदी बोला द
तड़पत हियरा के सरधा पुरा द
लिखी लिखी भेजतानी पतिया ए रामा ,
पिया नाहि अइलें
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सुरेश कांटक - मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान लेखक परिचयः
नाम: सुरेश कांटक
ग्राम-पोस्ट: कांट
भाया: ब्रह्मपुर
जिला: बक्सर
बिहार - ८०२११२

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