छुपवली उ काहे - संदीप राज़ आंनद

छुपवली उ काहे बतवली काहे ना।
जे रहल मोहब्बत जतवली काहे ना॥

अँखिया से अँखिया मिलावत त रहली
इशारा में हमके बोलावत त रहली
पर उनकर इशारा बुझाइल ना हमरा
लजइली उ काहे समझवली काहे ना।
छुपवली उ काहे बतवली काहे ना॥

उ खिड़की से झांकल छत प से ताकल
देखी हमरा के उनकर शरमा के भागल
जमाना के डरे हम आगे ना अइनी
डेरइली उ काहे बोलवली काहे ना।
छुपवली उ काहे बतवली काहे ना॥
---------------------------------------
Sandeep Raj Anand, भोजपुरी कविता, भोजपुरी साहित्य, भोजपुरी साहित्यकोश, Bhojpuri Poem, Bhojpuri Kavita, Bhojpuri Sahitya, Bhojpuri Literature, Bhojpuri Sahityakosh, Bhojpuri Magazine, भोजपुरी पत्रिकालेखक परिचय:-
नाम: संदीप राज़ आंनद
संक्षिप्त परिचय-छात्र,स्नातक (हिन्दी साहित्य) इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय
प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)
सम्पर्कसूत्र-7054696346
ग्राम-अहिरौली,पोस्ट-खड्डा
जनपद-कुशीनगर(उत्तरप्रदेश)

4 टिप्‍पणियां:

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.